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मनुस्मृति • अध्याय 8 • श्लोक 128
वाग्दण्डं प्रथमं कुर्याद्धिग्दण्डं तदनन्तरम्‌ । तृतीयं धनदण्डं तु वधदण्डमतःपरम्‌ ।।
राजा गुणियों को प्रथम बार अपराध करने पर वाग्दण्ड, उसके बाद (दूसरी बार अपराध करने पर) धिग्दण्ड, तीसरी बार आर्थिक दण्ड (जुर्माना) और इसके बाद वधदण्ड (अपराधानुसार शरीर ताडन अर्थात्‌ कोड़े बेंत से मारना या अंगच्छेद आदि या प्राण दण्ड) से दण्डित करे।
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