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मनुस्मृति • अध्याय 8 • श्लोक 127
अदण्ड्यान्दण्डयत्राजा दण्ड्यांश्वेवाप्यदण्डयन्‌ । अयशो महदाप्नोति नरकं चैव गच्छति ।।
अदण्डनीय को दण्डित करता हुआ तथा दण्डनीय को छोड़ता हुआ राजा बड़ा अयश पाता है तथा नरक को भी जाता है।
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