(न्यायाधीश या राजा) बार-बार किये गये अपराध, देश (ग्राम, वन आदि) काल (रात-दिन आदि), अपराधी की शारीरिक तथा आर्थिक शक्ति और अपराध के गौरव-लाघव का वास्तविक विचार कर दण्डनीय व्यक्ति को दण्डित करे।
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