ब्रह्मा के पुत्र मनु ने तीन वर्णो (क्षत्रिय, वैश्य तथा शूद्र) से विषय में दण्ड के दश स्थानों को (८।१२५) कहा है और ब्राह्मण तो पीडारहित अर्थात् बिना किसी प्रकार दण्डित किये केवल राज्य से निकाल दिया जाता है।
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