एतानाहुः कौटसाक्ष्ये प्रोक्तान्दण्डान्मनीषिभिः ।
धर्मस्याव्यभिचारार्थमधर्मनियमाय च ।।
(मनु आदि) विद्वानों ने धर्म के स्थापन तथा अधर्म के निवारण के लिए असत्य गवाहियों में इन (८।११०-१२१) दण्डों को बतलाया है।
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