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मनुस्मृति • अध्याय 8 • श्लोक 120
कामाद्दशगुण पूर्व क्रोधात्तु त्रिगुणं परम्‌ । अज्ञानादद्वे शते पूर्णे बालिश्याच्छतमेव तु ।।
काम से असत्य गवाही देने पर दश गुना प्रथम साहस, क्रोध से असत्य गवाही देने पर तिगुना मध्यम साहस, अज्ञान से असत्य गवाही देने पर सौ पण और असावधानी से असत्य गवाही देने पर सौ पण का 'दण्ड' (जुर्माना, न्यायाधीश उस असत्य गवाही देनेवाले पर) करे।
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