सभां वा न प्रवेष्टव्या वक्तव्यं वा समञ्जसम् ।
अब्रुवन्विब्रुवन्वाऽपि नरो भवति किल्बिषी ।।
या तो सभा (न्यायालय) में जाना ही नहीं चाहिये, या वहाँ जाकर सत्य ही बोलना चाहिये । सभा में जाकर कुछ नहीं कहता हुआ अर्थात् विवाद-विषय को जानकर भी किसी के भय से या पक्ष लेकर सत्य भाषण को छिपाने के उद्देश्य से कुछ नहीं कहता हुआ मनुष्य तत्काल पापभागी होता है।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
मनुस्मृति के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।
सभी अध्याय उपलब्ध
मनुस्मृति के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।