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मनुस्मृति • अध्याय 8 • श्लोक 12
सभां वा न प्रवेष्टव्या वक्तव्यं वा समञ्जसम्‌ । अब्रुवन्विब्रुवन्वाऽपि नरो भवति किल्बिषी ।।
या तो सभा (न्यायालय) में जाना ही नहीं चाहिये, या वहाँ जाकर सत्य ही बोलना चाहिये । सभा में जाकर कुछ नहीं कहता हुआ अर्थात्‌ विवाद-विषय को जानकर भी किसी के भय से या पक्ष लेकर सत्य भाषण को छिपाने के उद्देश्य से कुछ नहीं कहता हुआ मनुष्य तत्काल पापभागी होता है।
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