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मनुस्मृति • अध्याय 8 • श्लोक 116
यस्मिन्यस्मिन्विवादे तु कौटसाक्ष्यं कृतं भवेत्‌ । तत्तत्कार्य॑निवर्त्तेत कृतं चाप्यकृतं भवेत्‌ ।।
जिस-जिस विवाद (झगड़े-मुकदमे) में असत्य गवाही हो, (न्यायाधीश) उस-उस विवाद को फिर विचार करे और जिस विवाद में दण्ड-विधानादि (जुर्माने आदि का फैसला) हो चुका हो, वह समाप्त होकर भी नहीं समाप्त के समान है (अत: उस पर भी पुनर्विचार करे)।
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