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मनुस्मृति • अध्याय 8 • श्लोक 112
सत्येन शापयेद्विप्रं क्षत्रियं वाहनायुधैः । गोबीजकाञ्चनैर्वैश्यं शूद्रं सर्वैस्तु पातकैः ।।
ब्राह्मण को सत्य की, क्षत्रिय को वाहन (हाथी, घोड़ा आदि) तथा शस्त्र की, वैश्यों को गौ, व्यापार तथा सुवर्ण आदि धन की और शूद्र को सब पापों की शपथ करावे।
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