न वृथा शपथं कुर्यात्स्वल्पेऽप्यर्थे नरो बुधः ।
वृथा हि शपथं कुर्वन् प्रेत्य चेह न नश्यति ।।
विद्वान् (समझदार) मनुष्य छोटे काम के लिए भी असत्य शपथ न करे; क्योंकि असत्य शपथ लेता हुआ मनुष्य परलोक में (मरकर नरक पाने से) तथा इस लोक में भी (अपयश बदनामी पाने से) नष्ट होता है।
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