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मनुस्मृति • अध्याय 8 • श्लोक 108
असाक्षिकेषु त्वर्थेषु मिथो विवदमानयोः । अविन्दंस्तत््वतः सत्यं शपथेनापि लम्भयेत्‌ ।।
बिना साक्षी वाले मुकदमों में परस्पर विवाद करते हुए वादी तथा प्रतिवादी (मुद्दई तथा मुद्दालह) से ठीक-ठीक सच्चाई नहीं मालूम पड़ने पर राजा (न्यायाधीश) शपथ करके सच्चाई को मालूम करे।
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