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मनुस्मृति • अध्याय 8 • श्लोक 107
यस्य दृश्येत सप्ताहादुक्तवाक्यस्य साक्षिणः । रोगोऽग्निज्ञातिमरणमृणं दाप्यो दमं च सः ।।
गवाही देनेवाले गवाह के यहाँ (गवाही देने के बाद) एक सप्ताह में रोग; आग लगना अथवा बान्धवों (पुत्रादि निकट सम्बन्धियों) का मरण हो जाय तो ऋणी महाजन को सब धन देवे तथा राजा को दण्ड स्वरूप (ऋणद्रव्य का दशांश धन) देवे।
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