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मनुस्मृति • अध्याय 8 • श्लोक 106
त्रिपक्षादब्रुवन्साक्ष्यमृणादिषु नरोऽगदः । तदृणं प्राप्नुयात्सर्वं दशबन्धं च सर्वतः ।।
यदि स्वच्छ रहता हुआ भी साक्षी तीन पक्ष (डेढ़ मास) तक ऋण के मुकदमे में साक्ष्य गवाही न दे तो ऋणी मनुष्य ऋणदाता (महाजन) को सब लिया हुआ धन देवे तथा राजा को दण्डस्वरूप उक्त ऋणद्रव्य का दसवाँ भाग देवे।
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