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मनुस्मृति • अध्याय 8 • श्लोक 103
शूद्रविटक्षत्रविप्राणां यत्रर्तोक्तौ भवेद्रधः । तत्र वक्तव्यमनृतं तद्धि सत्याद्विशिष्यते ।।
जहाँ सत्य कहने पर शूद्र, वैश्य, क्षत्रिय या ब्राह्मण को प्राणदण्ड (फाँसी) होवे; वहाँ असत्य कहना (गवाही देना) चाहिए, क्योंकि वह असत्य कहना सत्य कहने से श्रेष्ठ है।
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