इस प्रकार सब कर्मो (गृहस्थ के त्याग अग्निहोत्रादि) का त्यागकर अपने (ब्रह्मसाक्षात्कार रूप) कार्य को प्रधान मानता हुआ (स्वर्ग आदि में भी) निस्पृह होकर संन्यास के द्वारा पापों को नष्ट कर (द्विज) परमगति (मोक्ष) को पाता है।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
मनुस्मृति के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।
सभी अध्याय उपलब्ध
मनुस्मृति के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।