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मनुस्मृति • अध्याय 6 • श्लोक 93
दशलक्षणकं धर्ममनुतिष्ठन्समाहितः । वेदान्तं विधिवच्छुत्वा संन्यसेदनृणो द्विजः ।।
उस दस लक्षण वाले धर्म (६।९२) को पालन करता हुआ द्विज सावधान चित्त होकर वेदान्त (उपनिषद्‌ आदि) को विधिवत्‌ (गुरु मुख से) सुनकर ऋणत्रय (६।३-६।३७) से छुटकारा पाकर संन्यास ग्रहण करे।
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