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मनुस्मृति • अध्याय 6 • श्लोक 87
सर्वेऽपि क्रमशस्त्वेते यथाशास्त्रं निषेविताः । यथोक्तकारिणं विप्रं नयन्ति परमां गतिम्‌ ।।
शास्र के अनुसार ग्रहण किये गये ये चारों आश्रम (६।८७) विधिवत्‌ अनुष्ठान करने वाले ब्राह्मण को परमगति (मोक्ष लाभ) को प्राप्त कराते हैं।
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