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मनुस्मृति • अध्याय 6 • श्लोक 83
इदं शरणमज्ञानामिदमेव विजानताम्‌ । इदमन्विच्छतां स्वर्गमिदमानन्त्यमिच्छताम्‌ ।।
वेदार्थ को नहीं जानने वालों के लिए यही वेद शरण (गति) है, (क्योंकि अर्थज्ञान के बिना भी वेदपाठ करने से पाप क्षय होता है) और वेदार्थ जानने वालों के लिए स्वर्ग (तथा मोक्ष) चाहने वालों के लिए भी यही वेद शरण (गति) है।
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