मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
मनुस्मृति • अध्याय 6 • श्लोक 76
अस्थिस्थूणं स्नायुयुतं मांसशोणितलेपनम्‌ । चर्मावनद्धं दुर्गन्धि पूर्ण मूत्रपुरीषयोः ।।
(उक्त दो श्लोकों से क्रमश: ब्रह्मदर्शन तथा उसके सहकारी कर्म को मोक्ष का साधन बतलाकर अब मोक्ष के अन्तरङ्गभूत यत्न और संसार से वैराग्य के लिए देह स्वरूप को अग्रिम दो श्लोकों से कहते हैं-) हड्डी रूप खम्भों वाला, स्नायु (रूप रस्सी) से युक्त, मांस और रक्तरूपी लेप (चूने से लिपना) वाला, चमड़े से ढका हुआ (पर्दे से युक्त), मल-मूत्र से भरा हुआ,
पूरा ग्रंथ पढ़ें
मनुस्मृति के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

मनुस्मृति के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें