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मनुस्मृति • अध्याय 6 • श्लोक 75
अहिंसयेन्द्रियासङ्गैवैदिकैश्चैव कर्मभिः । तपसश्चरणैश्चोग्रैः साधयन्तीह तत्पदम्‌ ।।
अहिंसा, विषयों की अनासक्ति, वेदप्रतिपादित कर्म और कठिन तपश्चरणों से इस लोक में उस पद (ब्रह्मपद) को साध लेते हैं । (इन कर्मो के आचरण से) ब्रह्म प्राप्ति कर लेते हैं।
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