ब्रह्म के साक्षात्कार से युक्त मनुष्य कर्मो से बाँधा नहीं जाता (जन्मजरामरणादि दुखः पाने के लिए संसार में जन्म नहीं लेता अर्थात् मुक्त हो जाता है) और ब्रह्मसाक्षात्कार से रहित मनुष्य संसार को प्राप्त करता (संसार में बार-बार जन्म ग्रहण करता) है।
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