प्राणायामों से रोग आदि दोषों को, परमात्मा में मन को लगाने से पापों को, विषयों से इन्द्रियों को रोककर विषय-संसर्गो को और ध्यान से ईश्वर-भिन्न काम, क्रोध लोभादि गुणों को जलावे-नष्ट करे।
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