जिस प्रकार सोना-चाँदी आदि धातु की मैल आग में धौंकने (तपाने) से जल जाती है, उसी प्रकार प्राणवायु के रोकने (प्राणायाम करने) से इन्द्रियों के दोष नष्ट हो जाते हैं।
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