यद्धक्षः स्यात्ततो दद्याद्वलिं भिक्षां च शक्तितः ।
अम्मूलफलभिक्षाभिरर्चयेदाश्रमागतम् ।।
जो भोज्य पदार्थ (६।५-- मुन्यन्न तथा शाक-मूल-फलादि) हो, उसी से बलि (बलिवैश्वदेवदि पञ्चमहायज्ञ कर्म) करे, भिक्षा दे और जल, कन्द तथा फलों की भिक्षा देकर आये हुए अतिथियों का सत्कार करे।
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