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मनुस्मृति • अध्याय 6 • श्लोक 67
फलं कतकवृक्षस्य यद्यप्यम्बुप्रसादकम्‌ । न नामग्रहणादेव तस्य वारि प्रसीदति ।।
यद्यपि निर्मली का फल पानी को स्वच्छ करने वाला है, किन्तु उसके नाममात्र लेने से पानी स्वच्छ नहीं होता। (इसी प्रकार केवल किसी धर्म के चिह्न धारण करने से और धर्म का पालन नहीं करने से धर्म नहीं होता)।
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