सूक्ष्मतां चान्ववेक्षेत योगेन परमात्मनः ।
देहेषु चैवोपपत्तिमुत्तमेष्वधमेषु च ।।
योग (विषयों से चित्त-व्यापार को रोकना) से परमात्मा की सूक्ष्मता (सर्वव्यापकता) का और उत्तम, मध्यम तथा नीच शरीर में (अपने कर्मो को भोगने के लिए) उत्पत्ति का चिन्तन करे।
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