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मनुस्मृति • अध्याय 6 • श्लोक 63
देहादुत्क्रमणं चास्मात्पुनर्गर्भे च संभवम्‌ । योनिकोटिसहस्रेषु सृतीश्चास्यान्तरात्मनः ।।
इस शरीर से जीवात्मा को बाहर निकालने (मरने), फिर गर्भ में उत्पन्न होने और इस अन्तरात्मा का हजारों करोड़ (शृगाल, कीट, पतंग, अत्यन्त नीच) योनियों में पैदा होने का चिन्तन करे।
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