मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
मनुस्मृति • अध्याय 6 • श्लोक 62
विप्रयोगं प्रियैश्चैव संयोगं च तथाऽप्रियैः । जरया चाभिभवनं व्याधिभिश्चोपपीडनम्‌ ।।
प्रिय (मित्र, पुत्र, स्री आदि) से वियोग, अप्रियों (शत्रु, हिंसक जीव, रोग, शोक आदि नहीं चाहे गये) से संयोग (साथ) होने, बुढ़ापे से आक्रांत होने और रोगों से पीड़ित होने का विचार करे।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
मनुस्मृति के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

मनुस्मृति के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें