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मनुस्मृति • अध्याय 6 • श्लोक 61
अवेक्षेत गतीर्जूणां कर्मदोषसमुद्भवाः । निरये चैव पतनं यातनाश्च यमक्षये ।।
(शास्रविहित का त्याग और शास्रनिन्दित का आचरण रूप) कर्मो के दोष से उत्पन्न मनुष्यों की तिर्यग्योनि आदि गतियों को, नरक में गिरने को तथा यमलोक की कठोर यातनाओं को विचार करे।
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