(शास्रविहित का त्याग और शास्रनिन्दित का आचरण रूप) कर्मो के दोष से उत्पन्न मनुष्यों की तिर्यग्योनि आदि गतियों को, नरक में गिरने को तथा यमलोक की कठोर यातनाओं को विचार करे।
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