अल्पान्नाभ्यवहारेण रहःस्थानासनेन च ।
हियमाणानि विषयैरिन्द्रियाणि निवर्तयेत् ।।
(सन्यासी) विषयों की ओर आकृष्ट होती हुई इन्द्रियों को थोड़ा भोजन और एकान्त वास के द्वारा रोके (वश में करे)।
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