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मनुस्मृति • अध्याय 6 • श्लोक 54
अलाबुं दारुपात्रं च मृण्मयं वैदलं तथा । एतानि यतिपात्राणि मनुः स्वायम्भुवोऽब्रवीत्‌ ।।
तुम्बा, लकड़ी, मिट्टी, बांस के पात्र यतियों (संन्यासियों) के हों, ऐसा स्वयम्भुपुत्र मनु ने कहा है।
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