मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
मनुस्मृति • अध्याय 6 • श्लोक 51
न तापसैर््राह्मणैर्वा वयोभिरपि वा श्वभिः । आकीर्ण भिक्षुकैर्वाऽ न्यैरागारमुपसंव्रजेत्‌ ।।
बहुत से वानप्रस्थियों या अन्य साधुओं, ब्राह्मणों, पक्षियों कुत्तों या दूसरे भिक्षुकों से युक्त (जहाँ ये पहुँचे हों ऐसे) घर में (भिक्षा के लिये) न जावे।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
मनुस्मृति के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

मनुस्मृति के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें