न चोत्पातनिमित्ताभ्यां न नक्षत्राङ्गविद्यया ।
नानुशासनवादाभ्यां भिक्षां लिप्सेत कर्हिचित् ।।
उत्पात (भूकम्प, उल्कापात आदि) निमित्त (शरीर या नेत्रादि का फड़कना), नक्षत्र (अश्विनी आदि), अङ्गविद्या (हस्तरेखा आदि), अनुशासन (ऐसी राजनीति है इस मार्ग से चले आदि) और बाद (शास्रो के अर्थ-- कथात्मक आदि) से कभी भी भिक्षा लेने की इच्छा न करे।
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