मुन्यन्नैर्विविधैर्मेध्यैः शाकमूलफलेन वा ।
एतानेव महाञज्ञान्निर्वपेद्विधिपूर्वकम् ।।
पवित्र अनेकविध मुन्यन्न (नीवार आदि) अथवा शाक, मूल और फल आदि से पूर्वोक्त (३।७०) पञ्चमहायज्ञों को विधिपूर्वक करता रहे।
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