मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
मनुस्मृति • अध्याय 6 • श्लोक 5
मुन्यन्नैर्विविधैर्मेध्यैः शाकमूलफलेन वा । एतानेव महाञज्ञान्निर्वपेद्विधिपूर्वकम्‌ ।।
पवित्र अनेकविध मुन्यन्न (नीवार आदि) अथवा शाक, मूल और फल आदि से पूर्वोक्त (३।७०) पञ्चमहायज्ञों को विधिपूर्वक करता रहे।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
मनुस्मृति के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

मनुस्मृति के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें