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मनुस्मृति • अध्याय 6 • श्लोक 4
अग्निहोत्रं समादाय गृह्यं चाम्निपरिच्छदम्‌ । ग्रामादरण्यं निष्क्रम्य निवसेन्नियतेन्द्रियः ।।
श्रौत तथा आवसथ अग्नि और खुकखुवा आदि तत्सम्बन्धी सामग्री लेकर ग्राम से बाहर वन में जाकर जितेन्द्रिय होकर रहे।
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