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मनुस्मृति • अध्याय 6 • श्लोक 39
यो दत्त्वा सर्वभूतेभ्यः प्रत्रजत्यभयं गृहात्‌ । तस्य तेजोमया लोका भवन्ति ब्रह्मवादिनः ।।
जो सब (स्थावर तथा जङ्गम) प्राणियों के लिये अभय देकर गृह से संन्यास ले लेता है, उस ब्रह्मज्ञानी के तेजोमय लोक (ब्रह्मलोक आदि) होते हैं अर्थात्‌ वह उन लोकों को प्राप्त करता है।
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