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मनुस्मृति • अध्याय 6 • श्लोक 37
अनधीत्य द्विजो वेदाननुत्पाद्य तथा प्रजाम्‌ । अनिष्ट्वा चैव यज्ञैश्च मोक्षमिच्छन्‌ व्रजत्यधः ।।
द्विज बिना वेद का अध्ययन किये, तथा पुत्रों को बिना उत्पन्न किये और (अग्निष्टोम आदि) यज्ञों का बिना अनुष्ठान किये मोक्ष को (संन्यासाश्रम के ग्रहण द्वारा) चाहता हुआ भी नरक को जाता है।
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