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मनुस्मृति • अध्याय 6 • श्लोक 32
आसां महर्षिचर्याणां त्यक्त्वाऽ न्यतमया तनुम्‌ । वीतशोकभयो विप्रो ब्रह्मलोके महीयते ।।
पूर्वोक्त महर्षि-पालित नियमों में से किसी एक का पालन करता हुआ शोक तथा भय से रहित ब्राह्मण शरीर त्यागकर ब्रह्मलोक में पूजित होता (मोक्ष को प्राप्त करता) है।
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