अपराजितां वाऽऽस्थाय व्रजेद्दिशमजिहाग: ।
आ निपाताच्छरीरस्य युक्तो वार्यनिलाशनः ।।
अचिकित्सित रोग आदि के उत्पन्न होने पर सरल बुद्धि वाला (वानप्रस्थयति) केवल जल और वायु के आहार पर रहता हुआ शरीर के पतन (मरण) होने तक दक्षिण दिशा की ओर चले।
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