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मनुस्मृति • अध्याय 6 • श्लोक 3
सन्त्यज्य ग्राम्यमाहारं सर्व चैव परिच्छदम्‌ । पुत्रेषु भार्या निक्षिप्य वनं गच्छेत्सहैव वा ।।
ग्राम्य आहार (धान, यव आदि ग्राम सम्बन्धी भोजन) तथा परिच्छद (गौ, घोड़ा, हाथी, शय्या आदि गृह-सम्पत्ति) को छोड़कर वन में जाने की इच्छा नहीं करने वाली अपनी पत्नी को पुत्र के उत्तरदायित्व (देख-रेख) में सौंपकर तथा वन में साथ जाने की इच्छा करने वाली अपनी पत्नी को साथ में लेकर वन को जावे।
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