मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
मनुस्मृति • अध्याय 6 • श्लोक 29
एताश्चान्याश्च सेवेत दीक्षा विप्रो वने वसन्‌ । विविधाश्चौपनिषदीरात्मसंसिद्धये श्रुतीः ।।
वन में निवास करता हुआ (वानप्रस्थी) ब्राह्मण इन नियमों को तथा स्वशास्रोक्त नियमों को सेवन करे और आत्मसिद्धि (ब्रह्मप्राप्ति) के लिए उपनिषदों तथा वेदों में कथित विविध वचनों का अभ्यास करे।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
मनुस्मृति के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

मनुस्मृति के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें