मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
मनुस्मृति • अध्याय 6 • श्लोक 28
ग्रामादाहृत्य वाऽ श्रीयादष्टौ ग्रासान्वने वसन्‌ । प्रतिगृह्ण पुटेनैव पाणिना शकलेन वा ।।
उन वनवासी गृहस्थी का भी अभाव होने पर वन में ही निवास करता हुआ (वानप्रस्थी तपस्वी) ग्राम से पत्रों में या सकोरों के खण्डों में अथवा हाथ में ही भिक्षा को लाकर केवल आठ ग्रास भोजन करे।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
मनुस्मृति के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

मनुस्मृति के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें