वानप्रस्थाश्रम के नियमानुसार वैतानिक अग्नि को आत्मा में रखकर (उस अग्नि के भस्म आदि को पीकर) वन में भी अग्नि और गृह का त्यागकर केवल मूल (कन्द आदि) तथा फल को खावे (नीवार आदि पवित्र मुन्यन्न का भी त्याग कर दे)।
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