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मनुस्मृति • अध्याय 6 • श्लोक 24
उपस्पृशंस्त्रिषवणं पितृन्देवांश्च तर्पयेत्‌ । तपश्चरंश्चोग्रतरं शोषयेद्देहमात्मनः ।।
तीनों समय (प्रातः, मध्याह्न और सायं) स्नान करता हुआ देवताओं, ऋषियों तथा पितरों का तर्पण करे और कठोर तपस्या करता हुआ अपने शरीर को सुखा दे (क्षीण कर दे)।
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