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मनुस्मृति • अध्याय 6 • श्लोक 22
भूमौ विपरिवर्तेत तिष्ठेद्वा प्रपदैर्दिनम्‌ । स्थानासनाभ्यां विहरेत्सवनेषूपयन्नपः ।।
भूमि पर लेटे तथा टहले या पैर के अगले भाग (चौत्र) पर दिन में कुछ समय तक खड़ा रहे या बैठा रहे (बीच-बीच में टहले नहीं अर्थात्‌ घूमे-फिरे नहीं) और प्रातःकाल, मध्याह्रकाल तथा सायंकाल में (तीन बार) स्नान करे।
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