पुष्पमूलफलैर्वाऽपि केवलैर्वर्तयेत्सदा ।
कालपक्वैः स्वयं शीणैवैखानसमते स्थितः ।।
अथवा वैखानस (वानप्रस्थ) आश्रम में रहने वाला (वानप्रस्थी यती) सर्वदा केवल समय पर पके स्वयं गिरे हुए फूल तथा मूल और फलों से ही जीवन निर्वाह करे।
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