चान्द्रायणविधानैर्वा शुक्लकृष्णे च वर्तयेत् ।
पक्षान्तयोर्वाऽप्यश्रीयाद्यवागूं क्वथितां सकृत् ।।
अथवा शुक्ल तथा कृष्णपक्ष में चान्द्रायण के नियम (११।२१६) से भोजन करे, अथवा अमावस्या तथा पूर्णिमा को दिन या रात्रि में केवल एक बार पकाई हुई यवागू का भोजन करे।
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