नक्तं चान्नं समश्रीयाद्विवा वा55हृत्य शक्तितः ।
चतुर्थकालिको वा स्यात्स्याद्वाऽप्यष्टमकालिकः ।।
(वानप्रस्थी) यथाशक्ति अन्न को लाकर सायंकाल (रात्रि में), या दिन में अथवा एक दिन पूरा उपवासकर दूसरे दिन सायंकाल, या तीन रात उपवासकर चौथे दिन सायंकाल भोजन करे।
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