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मनुस्मृति • अध्याय 6 • श्लोक 18
सद्यः प्रक्षालको वा स्यान्माससंचयिकोऽपि वा । षण्मासनिचयो वा स्यात्समानिचय एव वा।।
(वानप्रस्थी) एक दिन, एक मास, छ: मास या एक वर्ष तक खाने योग्य नीवार आदि मुन्यन्न का संग्रह करे।
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