स्थलजौदकशाकानि पुष्पमूलफलानि च ।
मेध्यवृक्षोद्धवान्यद्यात्स्नेहांश्च फलसंभवान् ।।
भूमि तथा जल में उत्पन्न शाक को, वृक्षों के पवित्र पुष्प, मूल तथा फल को और फलों से बने स्नेह को भोजन करे।
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